December 2, 2022 3:58 AM

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दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सुफलाम 2022 का हुआ समापन, बुंदेलखंड में मृदा उपयोग योजना अपनाने की जरूरत-मोहनी मोहन।

झांसी:रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झॉंसी, के सभागार में पंचमहाभूत पर केन्द्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी सुफलाम – 2022 का आज द्वितीय दिवस पर समापन हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता कुलपति डॉ. एस के चतुर्वेदी ने की। इस कार्यक्रम में चित्रकूट विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एन.सी.गौतम, भारतीय किसान संघ के महामंत्री मोहनी मोहन मिश्रा, भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. अमरेश चन्द्रा समेत विश्वविधालय के समस्त अधिकारी, शिक्षक एवं विभिन्न जिलों से किसान भी उपस्थित रहे। इस मृदा केन्द्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कुल 6 तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। इसमें एकीकृत मृदा एवं जल प्रबंधन, स्थानीय या देशी संसाधनों के माध्यम से मृदा की उर्वरता शक्ति को वहाल करना, बुन्देलखण्ड क्षेत्र में सतत् मृदा स्वास्थ्य की सफलता की कहानी, मृदा कायाकल्प के लिए पशु आधारित खेती वानिकी, कृषि वानिकी एवं सहायक उद्यम के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, प्राकृतिक एवं जैविक कृषि द्वारा टिकाऊ मृदा स्वास्थ्य पर व्यापक रूप से चर्चा हुई। भारतीय किसान संघ के महामंत्री मोहनी मोहन मिश्रा ने अपने व्याख्यान में कहा कि आज मृदा उपयोग योजना अपनाने की जरूरत है। प्रथम तकनीकी सत्र में खेतों में वर्षा जल का संचयन, खेत तालाब का निर्माण तथा भूमि उपयोग योजना पर डॉ. आर.एस. यादव एवं डॉ. एम.एस. रघुवंशी ने परिचर्चा की। द्वितीय सत्र में डॉ. ए.के. विश्वास तथा डॉ. ए.के. सक्सेना ने मृदा सुधार तथा सूक्ष्म जीवों की विविधता के साथ फसल अवशेष चक्रण पर विस्तार से समझाया। तृतीय तकनीकी सत्र में डॉ. मानवेन्द्र सिंह, ने सहभागी जल संचयन एवं इसके विवेकपूर्ण उपयोग, सुश्री ब्रह्नकुमारी बी.के. मनोरमा ने योगिक खेती तथा डॉ. मुकेश शहगल में जैविक खेती में जैव नियंत्रण की जरूरतों पर जोर दिया। चौथे सत्र में डॉ. अमरेश चन्द्रा ने दलहनी चारा फसलों एवं प्राकृतिक खेती द्वारा मृदा सुधार तथा डॉ. के.के. सिंह ने दुधारू पशुओं के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य पर प्रकाश डाला। पांचवे सत्र में डॉ. एस.के. तिवारी ने बुंदेलखण्ड में कृषि वानिकी एवं सहायक उद्यम के माध्यम से मृदा सुधार एवं पोषण सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा की। छठे एवं अंतिम सत्र में डॉ. एम.सी. मन्ना ने बुंदेलखण्ड की खराब हुई मिट्टी को सुधारने पर प्रकाश डाला। बुंदेलखण्ड के विभिन्न जिलों से आये तथा देश के कई राज्यों से आये वैज्ञानिकों ने संक्षेप में अपने विचार प्रकट किये। इस संगोष्ठी से प्राप्त सभी निष्कर्षों पर काशी हिन्दु विश्वविद्यालय में होने वाले अर्न्तराष्ट्रीय संगोष्ठी में परिचर्चा की जायगी जिसे अततः भारत सरकार के नीति निर्माताओं के समक्ष प्रस्तुत की जायेगी। संगोष्ठी में देश भर के विभिन्न शोध एवं शिक्षण संस्थानों से मृदा विशेषज्ञों ने अपने – अपने विचार रखे। इस संगोष्ठी का आयोजन रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय झॉसी, बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय झॉसी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, भारतीय किसान संघ एवं नाबार्ड के संयुक्त प्रयासों से सम्पन्न हुआ। डॉ. प्रशांत जाम्भुलकर ने संगोष्ठी के अंत में सभी छः तकनीकी सत्रों का सारांश प्रस्तुत किया। इस संगोष्ठी का यूटयूब पर भी जीवन्त प्रसारण किया गया इसमें तकनीकी संचालन डॉ. तनुज मिश्रा एवं सौरभ सिंह गौर ने किया। संगोष्ठी के आयोजक सचिव के रूप में डॉ. योगेश्वर सिंह एवं डॉ. गौरव शर्मा, केवल गौमूत्र खेती के कृषक धर्मेंद्र नामदेव ने अपनी भूमिका निभाई। धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी अध्यक्ष, डॉ. एस.एस. सिंह ने किया। मंच संचालन डॉ. अर्तिका सिंह ने किया।

रिपोर्ट-संदीप कुमार रेजा

गुर्जर महेंद्र नागर

प्रधान सम्पादक

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