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क्या आप जानते हैं नींद में आने वाले सपनों में छुपा है बीमारी का राज़? ऐसा बार-बार होना है

नींद में सपने आना, सपनों में कोई कहानी होना, कभी-कभार नींद का टूट जाना कोई बड़ी बात नहीं. आमतौर पर ये घटनाएं सामान्य ही मानी जाती है. जितनी लंबी नींद उतने सारे सपने. जी हां, ऐसा तो आमतौर पर हर किसी ने महसूस किया होगा. मगर क्या कभी सोचा है कि रोज़ होने वाली इन क्रियाओं में खतरे की आहट भी हो सकती है जिसे हम अनसुना कर रहे है.

Slip Experts ने एक नई चेतावनी जारी की है. जिसमें बताया है कि आपके सपने और उन्हें याद रखने की क्षमता में कैसे छुपा है आपकी सेहत का राज़. नींद से जागते ही अगर आपका शरीर तुरंत एक्टिव नहीं हो पाता, मुंह से आवाज़ नहीं निकल पाती तो इसे अनदेखा न करें. ध्यान देने की कोशिश करें कि कहीं ऐसी घटनाएं रोज़ाना तो नहीं होती, कहीं सामान्य लगने वाली ये बातें आपकी किसी परेशानी की वजह तो नही बन रही?

sleep paralysis

सौ.सांकेतिक- सपने में क्या देखते हैं इसे कभी अनदेखा न करें, सपने में छुपा हो सकता है खतरा

सामान्य घटनाएं रोज़ होने लगे तो सावधान हो जाइए
जब हम नींद के सबसे गहरे चरण में होते हैं तब आते हैं सपने. सपने अक्सर कुछ कहने की कोशिश करते हैं. अधिकांश लोग अपने रात के सपनों को भूल जाते हैं, केवल कुछ लोग उसे जीवनभर याद रख पाते हैं. जबकि बार-बार सपने आना, या नींद का पक्षाघात, सामान्य घटनाएं हैं, हार्वर्ड के शोधकर्ता डिड्रे बैरेट (Harvard researcher Deidre Barrett) ने नोटिस किया कि अगर सपने मतिभ्रम और नींद का पक्षाघात सामान्य से ज्यादा होने लगे तो ये चिंता का विषय है. अब वक्त है कि जल्द ही डॉक्टर से संपर्क कर उनसे अपनी समस्या साझा करनी होगी. डॉ बैरेट के मुताबिक ये नींद का दौरा पड़ने के पहले का संकेत हो सकता है.

सपनों में छुपा है बीमारी राज़
स्लीप पैरालिसिस एक ऐसी घटना है जो तब होती है जब इंसान सपने से जागता है, लेकिन फिर भी हिलने, बात करने या चीखने में सहज महसूस नहीं करता. स्लीप पैरालिसिस और मतिभ्रम जैसी चीजें उन लोगों में अधिक आम हैं जो नार्कोलेप्सी जैसी नींद की बीमारी से पीड़ित हैं. मनोवैज्ञानिक एलन ईसर (Psychologist Alan Eiser) ने वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि हमें अपने सपनों में आने वाली घटनाओं को नज़र अंदाज़ नहीं करना चाहिए. ईसर का मानना है कि आवर्ती दुःस्वप्न (Recurring nightmares) जीवन में व्यक्तिगत तनाव की वजह से होते हैं, ये आवर्ती सपने कुछ दवाओं से भी बदतर हो सकते हैं जिनमें एंटी-डिस्पेंटेंट शामिल हैं. बैरेट कहते हैं कि जो लोग रात में अधिक समय तक सोते हैं, उनके सपनों को अधिक याद रखने की संभावना अधिक होती है. और जिन लोगों को कम नींद आती है, वो शायद अपनी याददाश्त के प्रति प्रतिबद्ध न हों.

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